Sun Le Ram Di Vaani Uth Jaag Swere Ni Zindiye

Sun Le Ram Di Vaani Uth Jaag Swere Ni Zindiye

उठ जाग सवेरे नि जिंदडीये सुन ले राम दी वाणी,
हूँ सत्संग कर ले नि जिंदडीये बड़ी किती मनमानी,
उठ जाग सवेरे नि……

इस जीवन विच धर्म ना किता ना कोई पुन कमाया,
कर कर बन्दिया तू दान राती हीरा जन्म गवाया,
यम ऐसा मारनगे जिंदडीये पीन ना देंगे पानी,
उठ जाग सवेरे नि….

ना रहे छोटे ना रहे वडे न रहे राजे राने,
चार दिहाड़ी हस खेल के कर गये कुझ मकाने,
तू ऐसा उड़ जाना जिंदडीये जीयु अखियाँ दा पानी,
उठ जाग सवेरे नी……

मैं मैं दिल दादूर हटा के कर संता दी सेवा,
सेवा कर्ण तो ही मिलदा है तीन लोक दा मेवा,
तू अवे झुक जावी जिंदडीये जीयु तुहता दी ताहनी,
उठ जाग सवेरे नी..

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